क्या सरेंडर करने वाला है ईरान? ट्रंप के बड़े दावे पर क्या बोला तेहरान
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में G7 देशों के सामने दावा किया कि ईरान बहुत जल्द आत्मसमर्पण कर सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
ट्रंप का बड़ा दावा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, G7 अधिकारियों ने ट्रंप के साथ हुई बातचीत की जानकारी साझा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने ईरान के नए संभावित सर्वोच्च नेता मुजतबा खामिनई को लेकर भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिका ईरान के इस्लामी शासन को खत्म करने के लिए पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार है।
ट्रंप का कहना है कि युद्ध के परिणाम को लेकर उन्हें पूरा भरोसा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका इस संघर्ष में जीत की ओर बढ़ रहा है और ईरान को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।
सोशल मीडिया पर ट्रंप का बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में लिखा कि अमेरिका ईरान के "आतंकवादी शासन" को सैन्य, आर्थिक और अन्य सभी तरीकों से कमजोर कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोग कुछ बड़े मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट पढ़ेंगे तो उन्हें लगेगा कि अमेरिका पीछे है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसकी वायुसेना भी कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि मिसाइलें, ड्रोन और अन्य सैन्य संसाधनों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ट्रंप के अनुसार अमेरिका के पास अत्याधुनिक हथियार, पर्याप्त गोला-बारूद और समय दोनों मौजूद हैं।
ईरान का जवाब
दूसरी ओर ईरान ने भी इस बयान पर कड़ा जवाब दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने अपने सैन्य अभियान “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4” के 44वें चरण की शुरुआत कर दी है।
IRGC के अनुसार इस अभियान के तहत इजराइल के कब्जे वाले क्षेत्रों और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई में एक टन वजनी वारहेड ले जाने वाली “खैबर शिकन” मिसाइल का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों में तेल अवीव, इलात और कई अन्य रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया गया।
ईरानी सेना का बयान
ईरान के खातम-अल-अंबिया मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं आखिरी सांस तक अपने देश की रक्षा के लिए डटी रहेंगी।
उन्होंने कहा कि जो भी देश या ताकत ईरान के खिलाफ कार्रवाई करेगा, उसे अपने कदमों की कीमत चुकानी पड़ेगी।
हॉर्मोज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अमेरिकी प्रशासन ने शुरुआत में इस संभावना को कम करके आंका था कि ईरान जवाबी कार्रवाई में हॉर्मोज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश कर सकता है।
बताया जा रहा है कि सैन्य अभियान की योजना बनाते समय पेंटागन और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस स्थिति का पूरा अनुमान नहीं लगाया था। हालांकि अमेरिकी सेना ने लंबे समय से ऐसी आपात स्थितियों के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार कर रखी हैं।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान भी खुलकर जवाब दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में जरूर बताएं।