ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ट्रंप का यू-टर्न: रूस से तेल खरीदने पर मिली अस्थायी छूट
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है। इसी बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को रूस से तेल खरीदने पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देनी पड़ी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई को लेकर गंभीर संकट की आशंका पैदा हो गई है।
कुछ ही हफ्ते पहले तक अमेरिका का रुख बिल्कुल सख्त था। वॉशिंगटन साफ कह रहा था कि अगर कोई देश रूस से तेल खरीदेगा तो उस पर भारी टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। भारत सहित कई देशों पर दबाव बनाया गया था कि वे रूस से दूरी बनाएं। लेकिन अब हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं।
रूस से तेल खरीदने पर अस्थायी छूट
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की है कि रूस से तेल खरीदने पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को फिलहाल अस्थायी तौर पर ढील दी जा रही है। उनके अनुसार यह एक टेलर्ड और शॉर्ट-टर्म कदम है जिसका मकसद ईरान-इजराइल-अमेरिका तनाव के कारण पैदा हुए आर्थिक दबाव को संभालना है।
दिलचस्प बात यह है कि यह छूट केवल भारत के लिए नहीं बल्कि कई देशों के लिए लागू की गई है। हालांकि यह राहत सीमित समय के लिए है, लेकिन इसका वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
रूस की भूमिका फिर बनी अहम
इस फैसले का स्वागत रूस ने भी किया है। क्रेमलिन की ओर से कहा गया कि रूस वैश्विक ऊर्जा बाजार का एक अहम हिस्सा है और दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से रूस की मासिक तेल निर्यात आय में अरबों डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इस आय का एक बड़ा हिस्सा सीधे रूसी सरकार के खजाने में जाएगा, जिससे उसे आर्थिक मजबूती मिलेगी।
यूक्रेन युद्ध पर पड़ सकता है असर
कई पश्चिमी विश्लेषकों ने इस फैसले की आलोचना भी की है। पुतिन सरकार के आलोचक बिल ब्राउडर का कहना है कि यह फैसला रूस को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा और यूक्रेन युद्ध को लंबा खींच सकता है।
उनका तर्क है कि जब रूस को तेल निर्यात से ज्यादा पैसा मिलेगा, तो वह युद्ध जारी रखने के लिए और संसाधन जुटा पाएगा।
दुनिया के पास सीमित विकल्प
फिलहाल वैश्विक ऊर्जा संकट की स्थिति यह है कि दुनिया के कई हिस्सों में तेल सप्लाई बाधित हो रही है। खासकर मिडिल ईस्ट के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ के आसपास तनाव बढ़ने से करीब 20% वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है।
ऐसी स्थिति में कई देशों के पास रूस से तेल खरीदने के अलावा ज्यादा विकल्प भी नहीं बचे हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी जटिल है क्योंकि उसके संबंध रूस और अमेरिका दोनों के साथ महत्वपूर्ण हैं।
ट्रंप के फैसले का बड़ा संदेश
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह फैसला दिखाता है कि वैश्विक राजनीति में ऊर्जा सुरक्षा कितनी बड़ी भूमिका निभाती है। कुछ ही हफ्तों पहले तक रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की बात करने वाला अमेरिका अब वैश्विक ऊर्जा संकट से बचने के लिए अस्थायी राहत देने को मजबूर हो गया है।
अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो आने वाले समय में तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।