कतर पर हमले से भारत की LPG सप्लाई पर खतरा? मोदी सरकार ने तुरंत लागू किया प्लान-B
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। भारत को सबसे ज्यादा एलपीजी गैस सप्लाई करने वाले देशों में शामिल कतर पर ईरान के हमले की खबरों ने वैश्विक गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने कतर में मौजूद एलपीजी गैस रिफाइनरीज को निशाना बनाया। इस हमले के बाद कतर को अस्थायी रूप से गैस उत्पादन रोकना पड़ा। इसका असर सीधे उन देशों पर पड़ सकता है जो कतर से बड़े पैमाने पर गैस आयात करते हैं, और भारत उनमें सबसे अहम है।
भारत की LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से
भारत अपने कुल एलपीजी आयात का लगभग 42% हिस्सा कतर से खरीदता है। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर संयुक्त अरब अमीरात है। अगर दोनों देशों को मिलाकर देखें तो भारत के कुल एलपीजी इंपोर्ट का करीब 62% हिस्सा कतर और यूएई से ही आता है।
हालांकि मौजूदा हालात में संयुक्त अरब अमीरात पर भी ईरान के हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, जिसकी वजह से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत ने तुरंत लागू किया प्लान-B
लेकिन हालात बिगड़ने से पहले ही भारत सरकार ने वैकल्पिक रणनीति पर काम शुरू कर दिया। सबसे पहले देश में घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए ताकि आंतरिक सप्लाई को मजबूत किया जा सके।
इसके साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए सप्लायर तलाशने शुरू कर दिए। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने तुरंत अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और कनाडा जैसे देशों से एलएनजी और एलपीजी गैस खरीदना शुरू कर दिया है।
इन देशों से अतिरिक्त गैस की खेप अब भारत पहुंचने भी लगी है, जिससे सप्लाई चेन को स्थिर रखने में मदद मिल रही है।
रूस ने भी भारत को दिया ऑफर
इसी बीच रूस ने भी भारत को एलएनजी सप्लाई करने की पेशकश की है। भारत में रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर भारत चाहे तो रूस उसे एलएनजी गैस बेचने के लिए तैयार है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी थी कि अगर रूस पर और प्रतिबंध लगाए गए तो वह यूरोप को मिलने वाली एलएनजी सप्लाई रोक सकता है।
इसके बावजूद भारत के साथ रूस की ऊर्जा साझेदारी लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत की कूटनीतिक जीत
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर भी टिकी हुई है। यही वह समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कई देशों को तेल और गैस की सप्लाई होती है।
भारत ने इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर भी तेजी से कदम उठाए। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास से बातचीत की।
इस बातचीत के बाद ईरान ने भरोसा दिलाया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय टैंकरों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
वैश्विक दबाव के बीच भारत का फैसला
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण दुनिया के कई देशों को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। पाकिस्तान, चीन, अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की है।
हालांकि फिलहाल भारत ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। सरकार की कोशिश है कि वैकल्पिक सप्लाई और कूटनीतिक रणनीति के जरिए ऊर्जा संकट का असर आम लोगों तक कम से कम पहुंचे।