युद्ध के बीच साहस की मिसाल: कैसे भारतीय कप्तान वाला ऑयल टैंकर सुरक्षित मुंबई पहुंचा

दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ इन दिनों युद्ध की आग में घिरा हुआ है। ऐसे हालात में, जब इस खतरनाक रास्ते से गुजरने से ज्यादातर जहाज डर रहे थे और कई जहाजों पर मिसाइल हमले तक हो चुके थे, उसी रास्ते से एक ऑयल टैंकर ने सुरक्षित भारत पहुंचकर सबको चौंका दिया।
यह जहाज सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर मुंबई तक पहुंचा और इसके पीछे एक भारतीय कप्तान की समझदारी और साहस की बड़ी भूमिका रही। यह जहाज “शेनलॉन्ग” (Shenlong) नाम का एक बड़ा ऑयल टैंकर है, जो सऊदी क्रूड ऑयल से लदा हुआ था। खास बात यह है कि यह पहला भारतीय गंतव्य वाला जहाज बना जो अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद भी सुरक्षित तरीके से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को पार कर सका।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़: दुनिया का सबसे अहम ऑयल रूट
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा है। दुनिया की तेल सप्लाई का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल इसी मार्ग से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है।
लेकिन फरवरी के आखिरी दिनों में हालात अचानक बदल गए। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। समुद्र में माइन बिछाए गए, कई जहाजों पर हमले हुए और कुछ जहाजों में आग लगने की खबरें भी सामने आईं। इन घटनाओं के बाद इस रूट पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई।
शेनलॉन्ग टैंकर की खतरनाक यात्रा
इसी तनावपूर्ण माहौल में शेनलॉन्ग नाम का टैंकर 1 मार्च को सऊदी अरब के रास तनूरा पोर्ट से रवाना हुआ। यह एक स्वेजमैक्स श्रेणी का बड़ा टैंकर है जिसमें लगभग 10 लाख बैरल सऊदी क्रूड ऑयल भरा हुआ था।
8 मार्च को यह जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के पास पहुंचा और यहीं पर जहाज ने एक अहम फैसला लिया— इसने अपना AIS (Automatic Identification System) बंद कर दिया।
“Going Dark” क्या होता है?
सामान्य परिस्थितियों में हर जहाज का AIS सिस्टम चालू रहता है। यह सिस्टम जीपीएस की तरह जहाज की लोकेशन, स्पीड और पहचान से जुड़ी जानकारी लगातार प्रसारित करता रहता है ताकि दूसरे जहाज और समुद्री प्राधिकरण उसे ट्रैक कर सकें।
लेकिन युद्ध जैसे संवेदनशील इलाकों में कभी-कभी जहाज जानबूझकर AIS बंद कर देते हैं। इसे “गोइंग डार्क” कहा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि दुश्मन जहाज की लोकेशन को ट्रैक न कर सके। हालांकि यह कदम बेहद जोखिम भरा होता है क्योंकि बिना सिग्नल के दूसरे जहाजों से टकराने का खतरा भी बढ़ जाता है।
सुरक्षित मुंबई पहुंचा जहाज
अगले ही दिन, यानी 9 मार्च को भारत के समुद्री क्षेत्र के पास इस जहाज का सिग्नल फिर से दिखाई दिया। इसके बाद बुधवार शाम को यह टैंकर सुरक्षित रूप से मुंबई पोर्ट पहुंच गया।
इस जहाज की कमान कैप्टन सुशांत सिंह साधू के हाथों में थी और उनके साथ कुल 29 क्रू मेंबर मौजूद थे। फिलहाल यह जहाज जवाहर दीप टर्मिनल पर खड़ा है, जहां से इसमें मौजूद क्रूड ऑयल को रिफाइनरी के लिए उतारा जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 36 घंटे का समय लगेगा।
क्यों अहम है यह घटना
यह घटना सिर्फ एक जहाज की यात्रा नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई की जटिलता और जोखिम को भी दिखाती है। युद्ध के हालात में भी तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए जहाजों को कितना बड़ा जोखिम उठाना पड़ता है, इसका यह बड़ा उदाहरण है।
इन तनावपूर्ण परिस्थितियों का असर वैश्विक बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और शिपिंग रेट्स लगभग तीन गुना तक बढ़ चुके हैं।
हालांकि शेनलॉन्ग की सुरक्षित यात्रा यह साबित करती है कि सही रणनीति, साहस और अनुभव के साथ बेहद मुश्किल परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की जा सकती है।