सुलगता 'हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य': क्या दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट की दहलीज पर है?

नई दिल्ली/दुबई: दुनिया की अर्थव्यवस्था जिस 'तेल की नस' के भरोसे दौड़ती है, वह इस वक्त भारी तनाव में है। हम बात कर रहे हैं स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) की, जो वर्तमान में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। बीते बुधवार को यहाँ जो कुछ भी हुआ, उसने अंतरराष्ट्रीय बाजार और शिपिंग कंपनियों की रातों की नींद उड़ा दी है।
एक दिन, तीन हमले और समंदर में दहकती आग
बुधवार का दिन इस समुद्री रास्ते के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। 'यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस' (UKMTO) की पुष्टि के मुताबिक, अलग-अलग घटनाओं में तीन जहाजों को निशाना बनाया गया।
1.पहला हमला: एक बड़े कार्गो शिप पर अज्ञात 'प्रोजेक्टाइल' से हमला हुआ। टक्कर इतनी जोरदार थी कि जहाज में भीषण आग लग गई। गनीमत रही कि क्रू को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन जलता हुआ जहाज घंटों तक समंदर की लहरों पर लावारिस तैरता रहा।
2.दूसरा हमला (11 मार्च 2026): सुबह करीब 7:28 बजे रास अल खैमा से 46 किमी दूर एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया गया। कप्तान के मुताबिक जहाज को काफी नुकसान पहुँचा है।
3.तीसरा हमला: दुबई से 93 किमी उत्तर-पश्चिम में एक 'बल्क कैरियर' पर हमला हुआ। जाँच जारी है, लेकिन इन बैक-टू-बैक हमलों ने साफ कर दिया है कि अब यहाँ नेविगेशन करना 'मौत से खेलने' जैसा हो गया है।
भौगोलिक मजबूरी का फायदा?
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की बनावट ही ऐसी है कि यहाँ जहाजों को घेरना आसान है। इसकी कुल चौड़ाई वैसे तो 33 किमी है, लेकिन बड़े जहाजों के निकलने लायक गहरा रास्ता (Operational lane) सिर्फ 11 किमी चौड़ा है। इसी संकरे रास्ते का फायदा उठाकर उपद्रवी तत्व या एजेंसियां जहाजों को निशाना बना रही हैं।
थम गया व्यापार: 37 से 'शून्य' तक का सफर
इन हमलों का असर इतना भयानक है कि आँकड़े डराने वाले हैं:
ट्रैफिक जाम: फरवरी के अंत तक जहाँ हर दिन औसतन 37 टैंकर यहाँ से गुजरते थे, अब वह संख्या लगभग शून्य पर पहुँच गई है।
फँसे हुए जहाज: करीब 150 से ज्यादा जहाज समुद्र में लंगर डाले खड़े हैं, क्योंकि बीमा कंपनियों ने 'वॉर रिस्क कवरेज' देने से मना कर दिया है।
तेल की किल्लत: पिछले 72 घंटों में सिर्फ 7 टैंकर यहाँ से निकल पाए, जिनमें से 5 ईरान से जुड़े थे। यानी बाकी दुनिया के लिए सिर्फ 2 टैंकर!
आपकी जेब पर क्या होगा असर?
अगर आप सोच रहे हैं कि दूर समंदर में हो रही इस हलचल से आपको क्या फर्क पड़ेगा, तो जवाब आपकी जेब में छिपा है।
महँगा कच्चा तेल: वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं। सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों का एक्सपोर्ट रुकने से दुनिया की 20% तेल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है।
LNG के दाम दोगुने: सिर्फ तेल ही नहीं, गैस (LNG) की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। कुछ क्षेत्रों में तो दाम दोगुने तक हो गए हैं।
लंबा रास्ता, ज्यादा खर्च: यदि जहाज इस रास्ते को छोड़ते हैं, तो उन्हें अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से घूमकर आना होगा। इससे यात्रा कई हफ्ते लंबी हो जाएगी और लॉजिस्टिक्स Ufff लागत बढ़ने से हर चीज महँगी हो जाएगी।
निष्कर्ष
फिलहाल स्थिति 'वेट एंड वॉच' की है। ईरान ने भले ही इन हमलों की जिम्मेदारी न ली हो, लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन की बढ़ती सक्रियता ने इलाके को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। यदि अगले कुछ दिनों में तनाव कम नहीं हुआ, तो एशिया से लेकर यूरोप तक एक ऐसा ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है, जिससे उबरने में सालों लग जाएंगे।